राजनीती

मानसून सत्र से पहले NDA का मिशन दो-तिहाई बहुमत, शरद पवार के 8 सांसदों पर टिकी नजर

 नई दिल्ली

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला है और इससे पहले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दो तिहाई बहुमत जुटाने की जुगत में जुटा हुआ है. पहले तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के पाला बदल और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की पार्टी में शामिल होने के बाद अब एनडीए की नजर शिवसेना (यूबीटी) की गठबंधन सहयोगी शरद पवार की पार्टी के सांसदों पर है। 

सूत्रों की मानें तो एनसीपी (शरद पवार) के लोकसभा में आठ सांसद एनडीए के संपर्क में हैं. हालांकि, इसे लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है कि इस सांसदों का ठिकाना कौन सी पार्टी होगी. एनडीए की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इन सांसदों को लेने के लिए तैयार नहीं है. बीजेपी नेतृत्व ने इनमें से किसी को मंत्री पद देने के कयास भी खारिज कर दिए हैं। 

शरद पवार की पार्टी के सांसद भविष्य में सुनेत्रा परिवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में जा सकते हैं. एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाएं फिलहाल नकारी जा रही हैं. एनसीपी (शरद पवार) के सांसदों की बगावत के पीछे पार्टी के कांग्रेस में विलय के कयासों को वजह बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस में विलय की अटकलों से शरद पवार की पार्टी के सांसदों में बेचैनी है। 

एनसीपी शरद गुट में बेचैनी 
दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों से भी इन सांसदों में बेचैनी की बात कही जा रही है. वे 2029 के लोक सभा चुनाव में अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नहीं बताए जा रहे हैं. इनमें से कई का मानना है कि कांग्रेस में विलय से शायद उनकी संसद में वापसी की संभावना प्रबल न रहे. इनमें से एक सांसद ने बताया कि वैसे भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव तीन साल दूर हैं. ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से दूरी बनाना और उनका विरोध करना उनके संसदीय क्षेत्रों में उन्हें कठिनाई पैदा कर रहा है। 
 
परिसीमन बिल पर सरकार का देंगे साथ?
सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण और परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर एनसीपी शरद पवार के इन सांसदों के समर्थन के रास्ते तलाशे जा रहे हैं. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या वे संविधान संशोधन विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं या फिर मतदान के दौरान अनुपस्थित रह कर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा कम करने में सरकार की मदद कर सकते हैं. एक नेता के अनुसार महाराष्ट्र में शरद पवार ने मुख्यमंत्री रहते हुए ही सबसे पहले महिला आरक्षण का कदम उठाया गया था. स्थानीय स्वशासन निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था. ऐसे में सैद्धांतिक तौर पर एनसीपी शरद पवार को इस बिल का समर्थन करने में परेशानी नहीं आनी चाहिए। 
 
शरद गुट में टूट की संभावना नहीं 
यह कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों की ही तरह एनसीपी शरद पवार के सांसदों के टूट कर विलय की संभावना फिलहाल नहीं है. बीजेपी नेतृत्व भी इसके पक्ष में नहीं बताया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व शरद पवार और सुप्रिया सुले से दूरी बना कर रखना चाहता है. ऐसे में उन अटकलों को खारिज कर दिया गया है कि एनडीए को समर्थन के बदले एनसीपी शरद पवार के नेताओं को केंद्र में मंत्री पद दिया जा सकता है। 

फिलहाल अजित गुट के साथ विलय नहीं 
दूसरी ओर एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावना को फिलहाल नकार दिया गया है. एनसीपी अजित पवार के नेताओं के मुताबिक अजित पवार के निधन के बाद से ही इस बारे में बात आगे नहीं बढ़ी है. कांग्रेस में एनसीपी शरद पवार के विलय की अटकलों ने इन संभावनाओं पर फिलहाल पूरी तरह से रोक भी लगा दी है. हालांकि, आगे चल कर एनसीपी शरद पवार के लोक सभा सांसदों के एनसीपी अजित पवार में विलय की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। 

शरद पवार की पार्टी के सांसद 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने टिकट को लेकर सशंकित हैं. एनसीपी (एसपी) के कुछ सांसदों का यह भी कहना है कि केंद्र में एनडीए की सरकार है ही, महाराष्ट्र में भी एनडीए ही सत्ता में है. ऐसे में उनको अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान कराने, विकास कार्य कराने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

इन सबके बीच चर्चा इस बात की है कि शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी के सांसदों का समर्थन किस तरह से एनडीए ले सकता है, इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इस पूरी कवायद के पीछे महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशें हैं। 

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